PM मोदी रूस यात्रा पर, लावरोव ने कहा भारत-रूस संबंध पहले से ज्यादा प्रासंगिक

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दिसंबर 2025 में भारत यात्रा के बाद अब भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस जाने की तैयारी कर रहे हैं। इस घोषणा का ऐलान रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने मॉस्को में आयोजित सम्मेलन “इंडिया एंड रूस: टुवर्ड्स अ न्यू बिलैटरल एजेन्डा” के दौरान किया। यह सम्मेलन रूसी इंटरनेशनल अफेयर्स काउंसिल और मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। सम्मेलन में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और लावरोव ने वीडियो लिंक के माध्यम से संबोधन दिया।
द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने का संकल्प
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने भारत और रूस के द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। लावरोव ने कहा कि पुतिन की भारत यात्रा से दोनों देशों के बीच नए क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा मिला है और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि अब दोनों देशों के बीच व्यापार का 96 प्रतिशत हिस्सा उनके राष्ट्रीय मुद्राओं यानी रुपए और रूबल में किया जा रहा है, जिससे आर्थिक स्वायत्तता और स्थिरता को बल मिलता है।

रणनीतिक साझेदारी और सहयोग के क्षेत्र
विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत-रूस के “विशेष रणनीतिक साझेदारी” पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के सहयोग से क्षेत्रीय और वैश्विक शांति, स्थिरता और प्रगति में योगदान मिलता है। उन्होंने व्यापार लक्ष्यों, नागरिक परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं जैसे कुडनकुलम प्रोजेक्ट, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, कुशल पेशेवरों की आवाजाही और ब्रिक्स व शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे मंचों में सहयोग पर विशेष ध्यान दिया। लावरोव ने भारत-रूस मित्रता को समय की कसौटी पर खरा बताया और इसे समानता, आपसी विश्वास, सम्मान और एक-दूसरे के हितों की समझ पर आधारित करार दिया।
भारत को 21वीं सदी की महाशक्ति बताया
लावरोव ने भारत को 21वीं सदी की महाशक्ति और एक विशिष्ट सभ्यता के रूप में वर्णित किया। उन्होंने भारत के साथ विशेष रणनीतिक साझेदारी को रूस की “निरपेक्ष विदेश नीति प्राथमिकता” करार दिया। पश्चिम एशिया में अमेरिका और इजरायल द्वारा उत्पन्न सैन्य-राजनीतिक संकट के बीच, उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में भारत-रूस संबंध पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं। लावरोव के विस्तृत बयान और जयशंकर के संतुलित संबोधन ने स्पष्ट कर दिया कि रूस भारत के साथ अपने संबंधों को और गहरा करना चाहता है। इस बीच भारत ने फिर से बड़े पैमाने पर रूस से कच्चा तेल खरीदना शुरू कर दिया है।